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सरकारी सुरक्षा भी, निजी गनर भी… वाराणसी के बाहुबली और रीलबाज कर रहे यूपीकोका का उल्लंघन, कार्रवाई कब?

वाराणसी में बढ़ती लाइसेंसी असलहों और सुरक्षा काफिलों की जांच की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। यूपीकोका के सख्त प्रावधानों के बावजूद शहर में कई प्रभावशाली लोग सरकारी सुरक्षा के साथ-साथ निजी गनर और लंबी-लंबी गाड़ियों के काफिले में चलते देखे जा रहे हैं। 

नियम स्पष्ट कहते हैं—सरकारी और निजी सुरक्षा साथ-साथ नहीं चलेगी। अगर कोई व्यक्ति सरकारी सुरक्षा के साथ निजी गनर लेकर चलता है, तो न केवल सरकारी सुरक्षा वापस होगी बल्कि शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जाएगा।

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हम लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं कि वाराणसी की सड़कों पर ऐसे काफिले चलते हैं जिनमें फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां शामिल होती हैं। 

ये गाड़ियां अक्सर ब्लैक शीशों के साथ चलती हैं, जबकि देश में इस पर स्पष्ट प्रतिबंध है। सवाल यह भी है कि इन काफिलों में चलने वाले हथियार और गनर नियमों के दायरे में हैं या नहीं।

यूपीकोका के तहत सख्त प्रावधान

कानून कहता है कि कोई भी व्यक्ति अगर सरकारी सुरक्षा के साथ निजी गनर लेकर चलता है, तो उसकी सरकारी सुरक्षा वापस हो सकती है और शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। 

संगठित अपराध से जुड़े व्यक्तियों को तो सरकारी सुरक्षा बिल्कुल नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, कोई भी लाइसेंसधारी तीन या अधिक लाइसेंसधारियों के साथ किसी धरना स्थल या बोली की जगह नहीं जा सकता, वरना उसका लाइसेंस रद्द हो जाएगा।

जांच की मांग तेज

सूत्रों के अनुसार, वाराणसी में कई असलहे ऐसे हैं जिनके लाइसेंस किसी और जिले के नाम पर हैं, लेकिन उन्हें लेकर कोई और चलता है। यही नहीं, कई सरकारी लाइसेंसधारी अपने हथियार निजी गनरों या परिचितों को पकड़ा देते हैं, जो कानून का खुला उल्लंघन है।

लोगों की मांग है कि प्रशासन वाराणसी में लाइसेंसी असलहों और सुरक्षा काफिलों की जांच कर यह सुनिश्चित करे कि न तो नियमों की धज्जियां उड़ें और न ही शहर की कानून-व्यवस्था खतरे में पड़े।