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साइबर अपराधियों से निपटने के लिए थानेदारों को 15 दिन में पूरी करनी होगी साइबर ट्रेनिंग, बिना प्रमाणपत्र के नहीं मिलेगा चार्ज

कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराधियों से मुकाबले के लिए थानेदारों और राजपत्रित अधिकारियों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब किसी भी थाने की कमान तभी सौंपी जाएगी जब संबंधित अधिकारी ने साइबर ट्रेनिंग पोर्टल के तीन मॉड्यूल—रिस्पांडर ट्रैक, फॉरेंसिक ट्रैक और इंवेस्टिगेटर ट्रैक—का कोर्स पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल कर लिया हो।


पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि जिन थाना प्रभारियों के पास अभी यह प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें 15 दिन की मोहलत दी गई है। इस अवधि में प्रशिक्षण पूरा न करने वालों को चार्ज नहीं दिया जाएगा। यही नियम राजपत्रित अधिकारियों पर भी लागू होगा। फील्ड में चार्ज लेने के लिए उन्हें यह कोर्स करना अनिवार्य होगा। साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए भी सीवाईटी (CYT) आवश्यक कर दिया गया है।

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अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस को साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रखना है। इससे पुलिसकर्मी नए-नए हथकंडों, ट्रेंड्स और मॉड्यूल की जानकारी हासिल करेंगे। पीड़ितों की शिकायतें तुरंत दर्ज होंगी और धोखाधड़ी में फंसी रकम वापस दिलाने के प्रयास तेज होंगे, जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा।


एसीपी साइबर क्राइम विदूष सक्सेना ने बताया कि साइबर अपराध की रोकथाम के लिए जगह-जगह जागरूकता एवं अवग्रहण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसमें लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग कॉल, फर्जी लिंक, और बैंकिंग फ्रॉड से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं, ताकि वाराणसी में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।