गंगा में इफ्तार पार्टी मामला: 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा– न्यायहित में रिहाई उचित नहीं
गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान चिकन बिरयानी परोसने और खाने के मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अब सभी आरोपियों को पुनः जेल भेज दिया गया है।
मामले की सुनवाई एडीजे (छठवें) आलोक कुमार की अदालत में हुई।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपियों को जमानत पर रिहा करना न्यायहित में नहीं है।
एक दिन पहले इस मामले में कोर्ट में उस समय हलचल मच गई थी, जब आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वकील के वकालतनामे को लेकर दूसरे पक्ष के अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि वकालतनामा किसी और का है और पैरवी कोई अन्य कर रहा है। इस पर अदालत ने भी नाराजगी जताते हुए ऐसी प्रक्रिया से बचने की सख्त हिदायत दी थी।
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजकुमार तिवारी, शशांक शेखर त्रिपाठी, नित्यानंद राय समेत अन्य वकीलों ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीसी
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संतोष तिवारी ने प्रभावी बहस प्रस्तुत की। उनके साथ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी और आशुतोष शुक्ला ने भी अदालत के समक्ष तर्क रखे।
वादी रजत जायसवाल ने आरोप लगाया था कि गंगा की पवित्र धारा में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई, जिसमें चिकन बिरयानी का सेवन किया गया और उसका अवशेष नदी में फेंका गया। इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला कृत्य बताया गया।
पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की थी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए गए, जिनमें इफ्तार पार्टी और मांसाहार सेवन की पुष्टि हुई।


