हनुमान जयंती पर संकट मोचन मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब: प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने साझा की अनूठी परंपराएं
धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर हनुमान जयंती का पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं।
इस अवसर पर मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने सभी भक्तों को शुभकामनाएं दीं और मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं की जानकारी साझा की।
बैठी हुई मुद्रा में दर्शन की अनूठी परंपरा
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने एक रोचक परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि संकट मोचन मंदिर में हनुमान जी सामान्य दिनों में खड़ी मुद्रा में विराजमान रहते हैं, लेकिन हनुमान जयंती के दिन विशेष रूप से उनकी ‘बैठी हुई झांकी’ सजाई जाती है।
उन्होंने कहा, “पूरे वर्ष हनुमान जी भक्तों के संकट हरने के लिए तत्पर (खड़े) रहते हैं,
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लेकिन उनके जन्मोत्सव पर विशेष अनुनय-विनय कर उन्हें विश्राम मुद्रा में बैठाया जाता है।”
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि दूर-दराज के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों की धूम
हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बन गया है।
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा के अनुसार,
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उत्सव का शुभारंभ पारंपरिक ध्वजा यात्रा से किया गया। इसके साथ ही:
शाम के समय मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली मंडलियों द्वारा रामचरितमानस का सामूहिक गान किया जाएगा।
मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक वातावरण के बीच भक्तों को प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने स्वयं अपने हाथों से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर उत्सव की गरिमा बढ़ाई।


