वाराणसी क्रिकेट एसोसिएशन (VCA) की कार्यशैली और चयन प्रक्रिया को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। खेल जगत से जुड़े लोगों का आरोप है कि संगठन में चयन और पदों की जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। वर्षों से चले आ रहे एकछत्र प्रभाव और संघ के भीतर बढ़ती अपारदर्शिता को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं।
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स्थानीय खिलाड़ियों और कोचों का सीधा आरोप है कि वीसीए सचिव जावेद अख्तर खान मुख्य रूप से केवल उन्हीं लोगों को एसोसिएशन में पद और जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं, जो उनकी जी-हुज़ूरी करते हैं। इसी कारण से वर्षों से संगठन में नए और प्रतिभावान चेहरों को आगे आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही क्रिकेट गलियारों में इन दिनों यह चर्चा भी काफी तेज है कि सचिव अपने पुत्र जमाल अख्तर की भूमिका को संघ में लगातार बढ़ा रहे हैं। ट्रायल सहित विभिन्न क्रिकेट गतिविधियों में उनकी सक्रिय मौजूदगी को देखते हुए खिलाड़ियों के बीच भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
मामला केवल जिला स्तर तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, जावेद अख्तर खान उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में भी निदेशक के रूप में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय खिलाड़ियों का सवाल है कि जब वह राज्य स्तर पर भी अहम भूमिका में हैं, तब जिला क्रिकेट में भी वर्षों से उनका ही प्रभाव क्यों बना हुआ है? खिलाड़ियों का साफ कहना है कि जिला क्रिकेट में समय-समय पर नए नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और नई कार्यशैली को बढ़ावा मिल सके।
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संघ की इस कार्यप्रणाली को लेकर अब कई तीखे सवाल प्रशासनिक और खेल गलियारों में गूंज रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि वाराणसी क्रिकेट एसोसिएशन में वर्षों से एक ही नेतृत्व क्यों कायम है और इसमें बदलाव कब देखने को मिलेगा? इसके अलावा, जिले के कितने खिलाड़ियों ने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे, सैयद मुश्ताक अली, दलीप ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी या आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट्स तक पहुंच बनाई है, इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। साथ ही, यूपीसीए से वाराणसी क्रिकेट एसोसिएशन को हर साल मिलने वाली आर्थिक सहायता, खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं और खर्च की गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करने पर जोर दिया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इन गंभीर आरोपों और उठते सवालों पर एसोसिएशन का क्या रुख रहता है।