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असि नदी की टैपिंग पर NGT की सख्ती: गंगा की सहायक नदी को नाला घोषित करने पर मांगा जवाब, NMCG महानिदेशक तलब

 

वाराणसी की पौराणिक असि नदी की टैपिंग और उसे नाले के रूप में वर्गीकृत किए जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) से सवाल किया है कि गंगा की सहायक नदी की टैपिंग की अनुमति राज्य सरकार को किस आधार पर दी गई और उसे नाले की श्रेणी में कैसे रखा गया।


मामले की सुनवाई के दौरान एनएमसीजी की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया, लेकिन उससे असंतुष्ट एनजीटी ने मिशन के महानिदेशक को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यह आदेश असि और वरुणा नदियों के जीर्णोद्धार की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

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याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी के अनुसार इस मामले की पहली सुनवाई 5 फरवरी को हुई थी। उस समय भी एनजीटी ने असि नदी की टैपिंग पर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि टैपिंग की अनुमति राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा दी गई है। इसके बाद अधिकरण ने मिशन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जिस पर बुधवार को नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान एनएमसीजी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि अस्थायी रूप से असि नदी की टैपिंग की गई है, ताकि गंगा नदी में अपशिष्ट जल का प्रवाह रोका जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर ही यह अनुमति प्रदान की गई थी।


हालांकि, एनजीटी की खंडपीठ इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई और मामले में विस्तृत जवाब के लिए एनएमसीजी के महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया।

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न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गंगा नदी प्राधिकरण आदेश-2016 के अनुसार असि नदी, गंगा का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में उसकी टैपिंग नदी की प्राकृतिक धारा में सीधा हस्तक्षेप है और यह सर्वोच्च न्यायालय के कमलनाथ मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों की भावना के भी विपरीत प्रतीत होता है।

सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि वाराणसी का नामकरण ही पौराणिक असि और वरुणा नदियों के नाम पर हुआ है। ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की नदी के साथ इस प्रकार का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है।


अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी, जिसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के महानिदेशक को राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।