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दिल्ली हादसे में जान गंवाने वाले अभिषेक का वाराणसी में अंतिम संस्कार, मणिकर्णिका घाट पर नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से जान गंवाने वाले तीन छात्रों में शामिल अभिषेक कुमार का शव सोमवार को वाराणसी लाया गया। मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर अभिषेक का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे की अंतिम विदाई के दौरान परिवार में चीख-पुकार मच गई। हादसे की खबर से सोनभद्र के रेणुकूट स्थित हिंडाल्को परिसर और चंदौली के झांसी गांव में शोक की लहर है।

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अभिषेक कुमार मूल रूप से चंदौली जनपद के झांसी गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में अपने परिवार के साथ सोनभद्र के रेणुकूट स्थित हिंडाल्को परिसर में रहते थे। उनके पिता संतोष कुमार हिंडाल्को में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। रविवार शाम बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद पिता परिजनों के साथ दिल्ली रवाना हुए थे। सोमवार सुबह एंबुलेंस से शव लेकर वाराणसी पहुंचे।

दो भाइयों में सबसे छोटे अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम की पढ़ाई कर रहे थे। वह आगे चलकर एमबीए करना चाहते थे। पढ़ाई को लेकर उनके बड़े सपने थे, लेकिन दिल्ली के दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली।

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अभिषेक ने रेणुकूट के निर्मला कॉन्वेंट स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। वह बीकॉम के दूसरे सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे थे।


मौत के बाद भी जिंदा रहेगा अभिषेक का सपना, किसी की दुनिया रोशन करेंगी आंखें


अभिषेक की मौत के बाद परिवार के लिए एक बेहद भावुक बात यह रही कि उन्होंने पहले से ही अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने पंजीकरण भी कराया था। हादसे के बाद उनकी आंखों का दान कराया गया।


बेटे को खोने के गहरे दुख के बीच पिता संतोष कुमार ने कहा कि अभिषेक को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बात का संतोष है कि उसकी आंखों से किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी लौट सकेगी। अभिषेक भले ही दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखें किसी और के लिए दुनिया देखने का माध्यम बनेंगी।

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अभिषेक के परिवार में एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन है। बड़ी बहन की पिछले वर्ष नवंबर में शादी हुई थी, जबकि बड़ा भाई बीटेक की पढ़ाई कर चुका है। अभिषेक परिवार का सबसे छोटा बेटा था।


अभिषेक के पिता ने बताया कि रविवार शाम करीब पौने पांच बजे रेणुकूट नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन रहे स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह बबलू के पुत्र शौर्य प्रताप सिंह ने मोबाइल पर उन्हें अभिषेक की मौत की सूचना दी थी। शौर्य भी दिल्ली में रहकर पढ़ाई करते हैं और उन्होंने शव को दिल्ली से वाराणसी लाने में परिवार की मदद की।


मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर अभिषेक का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, उसके अन्य पारिवारिक संस्कार पैतृक गांव चंदौली के झांसी में किए जाएंगे।