मणिकर्णिका घाट प्रकरण पर सियासी टकराव, सपा नेताओं को पुलिस ने किया नजरबंद
रविवार को मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद ने सियासी रंग ले लिया। मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद ने शनिवार को सियासी रंग ले लिया। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के वाराणसी दौरे से पहले ही पुलिस ने सपा के कई स्थानीय नेताओं को उनके आवासों पर नजरबंद कर दिया। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य घाट पर पहुंचकर राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी लेना था।
सपा नेताओं का कहना है कि शनिवार दोपहर करीब 12 बजे प्रतिनिधिमंडल के मणिकर्णिका घाट पहुंचने का कार्यक्रम तय था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए पार्टी के दर्जन भर से अधिक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया। इस कार्रवाई के बाद वाराणसी की सियासत में हलचल और तेज हो गई।
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सपा ने आरोप लगाया है कि काशी में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को हटाया जाना और कथित रूप से क्षतिग्रस्त होना केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि यह काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। पार्टी ने इसे सीधे तौर पर सांस्कृतिक नुकसान करार दिया है। इसी को लेकर सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से प्रतिनिधिमंडल गठित किए जाने का पत्र जारी किया गया था।
कौन हैं प्रतिनिधिमंडल में
इस प्रतिनिधिमंडल में सपा महानगर अध्यक्ष दिलीप डे, जिलाध्यक्ष सुजीत यादव, चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह, बलिया के सांसद सनातन पांडेय, मछली शहर की सांसद प्रिया सरोज, स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल, सुल्तानपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, वाराणसी दक्षिणी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी किशन दीक्षित, राज्य कार्यकारिणी सदस्य महेंद्र पाल उर्फ पिंटू पाल और अजहर अली सिद्दीकी शामिल हैं। सभी सदस्यों को प्रदेश मुख्यालय से अधिकृत पत्र भेजा गया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में चल रहे विकास कार्य के दौरान बुलडोजर चलाए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन्हीं में कुछ तस्वीरों को लेकर दावा किया गया कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुरानी प्रतिमा और अन्य ऐतिहासिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
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कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि विकास कार्य तय मानकों के अनुसार किया जा रहा है और किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं है।



