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अधिवक्ताओं को एक बार फिर बजट की प्राथमिकताओं से रखा गया बाहर- अधि.विकास सिंह

केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में अधिवक्ताओं के लिए किसी ठोस और स्वतंत्र प्रावधान का अभाव होने पर अधिवक्ता समाज ने गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। अधिवक्ता विकास सिंह ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि बजट में अधिवक्ताओं की मूलभूत समस्याओं और लंबे समय से चली आ रही मांगों को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया है।

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उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की आधारशिला माने जाने वाले देश के लाखों अधिवक्ताओं को बजट की प्राथमिकताओं से बाहर रखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अधिवक्ता समाज में निराशा का माहौल है। अधिवक्ता लंबे समय से समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कवर, वृद्ध और अस्वस्थ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन व्यवस्था, युवा अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता और स्टाइपेंड, न्यायालय परिसरों में चैंबर और पुस्तकालय जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा अधिवक्ता कल्याण कोष में वृद्धि की मांग करते आ रहे हैं।

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विकास सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं पर बढ़ते हमलों और उत्पीड़न की घटनाओं को देखते हुए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट (अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम) लागू करना समय की मांग है। उनका कहना है कि यह अधिनियम अधिवक्ताओं की पेशेगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने वाले तत्वों पर कठोर कार्रवाई करने और विधि व्यवसाय की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभिन्न वर्गों के लिए विशेष योजनाएं और पैकेज घोषित किए जा सकते हैं, तो न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ अधिवक्ताओं को बजट में स्थान क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मजबूत न्याय व्यवस्था के लिए अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

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अधिवक्ता समाज ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि पूरक बजट अथवा विशेष अधिवक्ता कल्याण पैकेज की जल्द घोषणा की जाए और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। साथ ही अधिवक्ता समाज ने अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही है।