पत्रकारपुरम में सजी यादों की अड़ी, जिलाधिकारी से लेकर पुलिस कमिश्नर तक ने दी डॉ. रामजी राय को श्रद्धांजलि
काशी की सांस्कृतिक परंपरा और बौद्धिक संवाद की जीवंत धारा से जुड़े रहे डॉ. रामजी राय की त्रयोदशाह के अवसर पर पत्रकारपुरम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा भावनाओं, स्मृतियों और आत्मीय संवाद का सजीव संगम बन गई। कार्यक्रम का वातावरण कुछ ऐसा रहा मानो अस्सी की प्रसिद्ध अड़ी अपने मूल स्वरूप के साथ यहां उतर आई हो, जहां चाय की चुस्कियों के बीच स्मृतियों और विचारों का सिलसिला देर तक चलता रहा।
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इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार काशीनाथ सिंह के शब्द उपस्थित लोगों के बीच बार-बार गूंजते रहे— “काशी का अस्सी जब तक रहेगा, रामजी राय भी जिंदा रहेंगे।” श्रद्धांजलि सभा में यह कथन केवल स्मरण नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व और विचारों की स्थायी उपस्थिति का प्रतीक बन गया।
पत्रकारपुरम में सजी अड़ी का वातावरण प्रसिद्ध अस्सी घाट की सांस्कृतिक ऊर्जा का एहसास कराता रहा। यहां मौजूद लोगों ने कहा कि डॉ. राय केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि काशी की उस जीवंत परंपरा का हिस्सा थे जहां संवाद, हास्य, विचार और सामाजिक सरोकार एक साथ बहते हैं। ‘पप्पू चाय की अड़ी’ की यादों के साथ चाय की महक और पुरानी बैठकों के किस्सों ने माहौल को और भावुक बना दिया।
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श्रद्धांजलि देने पहुंचे पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने डॉ. राय के व्यक्तित्व और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके पुत्र शैलेन्द्र राय और दामाद एमएलसी धर्मेन्द्र राय की उपस्थिति में वातावरण भावुक हो उठा।
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सभा में वरिष्ठ पत्रकार इंद्र बहादुर सिंह, विकास पाठक, सुनील सिंह सहित अनेक लोगों ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. रामजी राय की पहचान सहज, विनोदी और विचारशील व्यक्तित्व के रूप में रही। वहीं नागेश सिंह, सत्येन्द्र सिंह, संदीप सिंह और मुन्ना भाई समेत बड़ी संख्या में आत्मीयजन उपस्थित रहे।



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