शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सीएम योगी पर पलटवार, बोले— सनातन में राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं तय होती पहचान
वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी सरकार या राजनीतिक दल के प्रमाणपत्र से तय नहीं होती और न ही कोई राजनीतिक सत्ता यह निर्धारित कर सकती है कि कौन शंकराचार्य होगा।
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शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसमें कोई मुख्यमंत्री या सरकार किसी को प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी वासुदेवानंद को शंकराचार्य का प्रमाणपत्र दिया गया, जबकि इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों द्वारा रोक लगाए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना था कि अदालतें बार-बार कह चुकी हैं कि उन्हें शंकराचार्य न कहा जाए।
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इस दौरान उन्होंने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के समय भी शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार हुआ था और अब वही स्थिति दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि यही सोच है कि पहले किसी ने ऐसा किया था, तो अब हम भी कर सकते हैं, तो फिर दोनों में अंतर कैसे रह जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार 2015 में अखिलेश यादव पर अहंकार हावी हुआ था, उसी तरह की स्थिति अब दिखाई दे रही है।
शंकराचार्य ने गोरखनाथ परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोरखनाथ की वाणी में स्पष्ट है कि जो योगी बन जाता है, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई स्वयं को योगी और विरक्त मानता है, तो फिर राजनीतिक सत्ता स्वीकार करना कैसे उचित है।
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दरअसल, शुक्रवार को सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है। इसी बयान के बाद शंकराचार्य की यह प्रतिक्रिया सामने आई है।




