‘चिता भस्म की होली रोको, वरना चिता नहीं जलेगी’ — काशी में डोमराजा परिवार की चेतावनी
काशी में इस वर्ष मसान घाट पर खेले जाने वाली चिता भस्म की होली को लेकर विवाद गहरा गया है। डोमराजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी और काशी करवट के अजय शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में इस परंपरा की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से इसे तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है।
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डोमराजा परिवार का कहना है कि चिता भस्म की होली समाज में गलत संदेश देती है और यह मृतकों के प्रति असम्मान दर्शाती है। विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि काशी की परंपराएं आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती हैं, लेकिन किसी भी परंपरा का स्वरूप ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे सामाजिक या धार्मिक भावनाएं आहत हों। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस परंपरा को रोकने के लिए ठोस और स्पष्ट कदम उठाए जाएं।
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काशी करवट के अजय शर्मा ने भी इस परंपरा का विरोध करते हुए कहा कि मसान घाट पर भारी भीड़ के बीच चिता भस्म की होली खेलना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए।
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— The Varanasi News (@thevaranasinews) February 27, 2026
डोमराजा परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि भारी संख्या में लोग मसान घाट पहुंचकर चिता भस्म की होली खेलते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। परिवार का कहना है कि विरोध स्वरूप वे चिताओं में अग्नि देना बंद कर सकते हैं। यह बयान सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।
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उल्लेखनीय है कि वाराणसी में होली का पर्व विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। यहां की परंपराएं देश-विदेश तक प्रसिद्ध हैं। हालांकि इस बार चिता भस्म की होली को लेकर उठे विवाद ने पर्व की गरिमा और सामाजिक संवेदनशीलता पर नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे आमजन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर परंपरा के समर्थक इसे सदियों पुरानी आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोध करने वाले इसे बदलते सामाजिक परिवेश में अनुपयुक्त मान रहे हैं।



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