84 घाटों के गंगाजल से भगवान जगन्नाथ का हुआ महाअभिषेक, अब 14 दिनों तक नहीं होंगे दर्शन
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर काशी के अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का काशी के 84 घाटों के गंगाजल से विधि-विधानपूर्वक महाअभिषेक किया गया। भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ी। महिलाएं अस्सी घाट से डमरू दल के साथ कलश में गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचीं और भगवान का जलाभिषेक किया।
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अब 14 दिनों तक नहीं होंगे भगवान के दर्शन
मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगाजल से स्नान कराने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद तीनों देव विग्रह एकांतवास में चले जाते हैं।
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— The Varanasi News (@thevaranasinews) June 29, 2026
इस अवधि में अगले 14 दिनों तक भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होंगे। इस दौरान भगवान को औषधीय गुणों से युक्त परवल के काढ़े का भोग लगाया जाएगा और उनकी विशेष सेवा की जाएगी।
15वें दिन होगा नयनोत्सव
मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने बताया कि इस परंपरा को पुरी में 'अनासरा' कहा जाता है। इस दौरान भगवान एकांतवास में रहते हैं और किसी को दर्शन नहीं देते। 15 दिनों के बाद जब भगवान स्वस्थ होते हैं तो 'नयनोत्सव' मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है, नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और इसके बाद वे रथयात्रा के लिए तैयार होते हैं।
काशी में दर्शन का मिलता है पुरी जैसा फल
मान्यता है कि जो श्रद्धालु उड़ीसा स्थित जगन्नाथ धाम नहीं जा पाते, उन्हें काशी के अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने से भी समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि वाराणसी ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
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