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50 करोड़ की जमीन कांड में पहली बार बोले बीजेपी नेता सुरेश सिंह, कहा- "पूरी प्रक्रिया के तहत हुई रजिस्ट्री"; लेकिन कई सवाल अब भी बरकरार

मोहनसराय स्थित बुजुर्ग दंपति की करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के कथित हड़पने के मामले में आरोपी बनाए गए बीजेपी नेता सुरेश सिंह ने पहली बार भारत समाचार के कैमरे पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई।

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सुरेश सिंह ने कहा कि उन्होंने यह जमीन सीधे रिटायर शिक्षक ओमप्रकाश मिश्रा से नहीं, बल्कि उनके भतीजे विशाल मिश्रा से खरीदी थी। उनके अनुसार, ओमप्रकाश मिश्रा ने पहले जमीन अपने भतीजे को गिफ्ट डीड के जरिए हस्तांतरित की थी। इसके बाद 16 बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री विशाल मिश्रा ने उनके नाम की, जबकि 42 बिस्वा जमीन का रजिस्टर्ड सट्टा कराया गया, जिसमें विशाल मिश्रा के साथ रमेश सिंह भी शामिल थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि रजिस्ट्री से पहले विशाल मिश्रा के खाते में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।


सुरेश सिंह ने यह भी कहा कि वे ओमप्रकाश मिश्रा को पहले से जानते थे। उनके मुताबिक, ओमप्रकाश मिश्रा अपने परिवार से परेशान थे और उन्होंने स्वयं फोन कर जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात कही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरी प्रक्रिया ओमप्रकाश मिश्रा की जानकारी और सहमति से हुई।


पावर ऑफ अटॉर्नी के सवाल पर सुरेश सिंह ने कहा कि इसे ओमप्रकाश मिश्रा के बेटे ने उनसे जबरन लिया था, जिसे बाद में स्वयं ओमप्रकाश मिश्रा ने निरस्त करा दिया। हालांकि, यह निरस्तीकरण कब हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी वे नहीं दे सके।

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हालांकि, सुरेश सिंह के इस पक्ष के बावजूद मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जब ओमप्रकाश मिश्रा की पत्नी और बेटा जीवित हैं तथा वे स्वयं गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं, तो उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन भतीजे के नाम गिफ्ट क्यों की? गिफ्ट डीड होने के तुरंत बाद उसी दिन भतीजे द्वारा जमीन सुरेश सिंह को बेचने के पीछे क्या वजह थी? इसके अलावा इस पूरे प्रकरण में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, पुलिस की भूमिका और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई में देरी को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।


यह मामला इन दिनों पूरे वाराणसी में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित रिटायर शिक्षक ओमप्रकाश मिश्रा और उनकी पत्नी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है।