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प्रधानमंत्री जी संज्ञान लें, वरना जावेद-जमाल की दोहरी मार से खत्म होगा वाराणसी क्रिकेट

उत्तर प्रदेश क्रिकेट T 20 लीग का प्राइस डिस्ट्रीब्यूशन कार्यक्रम किसी समारोह से कम नहीं था, मगर इस बार चर्चा पुरस्कारों की नहीं, बल्कि 'बाप-बेटे' की उस जोड़ी की रही जिसने अलग-अलग दिन आकर मानो यह पैगाम दे दिया—"हम हैं ना, तो बाकी सब बेकार।"

जावेद अख्तर (UPCA निदेशक व VCA सचिव) और उनके बेटे जमाल अख्तर खान (UPCA क्रिकेट विकास समिति सदस्य व VCA संयुक्त सचिव) ने जिस अंदाज में दोनों संगठनों में अपनी जड़ें जमा ली हैं, उससे साफ है कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक पटकथा है—जिसमें पिता UPCA की कमान संभाले हैं तो बेटा उसी रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा है।

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पूछा जाता है—क्या VCA और UPCA जावेद और जमाल का पारिवारिक ठिकाना बन गया है? क्या यहाँ योग्यता, अनुभव और पारदर्शिता का कोई मोल नहीं? क्यों एक ही परिवार के दो लोग अलग-अलग दिन प्राइस डिस्ट्रीब्यूशन में आकर मानो अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं? यह तो मानो तानाशाही का खेल है, जहाँ फैसले पारिवारिक हितों के हिसाब से लिए जाते हैं।


PM तक पहुँची पीड़ा


स्थानीय क्रिकेटर्स अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगा रहे हैं—क्योंकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। उनका कहना है—


"PM जी, आपकी नज़र देश की हर चीज़ पर है, मगर आपके ही क्षेत्र में खिलाड़ियों के साथ कैसा खेल हो रहा है, क्या आपको पता है? बाप-बेटे की यह जोड़ी खिलाड़ियों की जान ले रही है—भले ही जान नहीं, तो क्रिकेट की जान ज़रूर निकाल रही है।"

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सवाल वही है—क्या BCCI, UPCA और खेल मंत्रालय इस मामले में कुछ करेंगे, या फिर जावेद-जमाल की 'गठजोड़' को अंधाधुंध बढ़ने दिया जाएगा?


खिलाड़ी अब सड़कों पर उतरने की बात कर रहे हैं, और कह रहे हैं "जब तक प्रधानमंत्री जी खुद हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक वाराणसी क्रिकेट का बाप-बेटा एकछत्र राज करता रहेगा।"


चर्चा है कि जावेद अख्तर ने VCA का कार्यालय अपने दालमंडी स्थित घर पर चला रखा है। लेकिन यहाँ एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है—बताया जा रहा है कि जावेद का वह घर भी 'ध्वस्तीकरण' में चला गया है। इससे एक विचित्र स्थिति पैदा हो गई है—एक तरफ VCA का कोई कार्यालय नहीं है, और दूसरी तरफ जो कार्यालय चल रहा था, वह भी अब अपनी जमीन पर नहीं रहा।

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एक जिला क्रिकेट एसोसिएशन का अपना कार्यालय होना न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए जरूरी है, बल्कि खिलाड़ियों को चयन, शिकायत निवारण और जानकारी के लिए एक निष्पक्ष मंच भी चाहिए। जब कार्यालय ही किसी के घर पर आधारित हो—और वह घर भी विवादास्पद स्थिति में हो—तो फिर खिलाड़ियों को न्याय कहाँ से मिलेगा?


जावेद अख्तर लगातार अपनी बचाव की कोशिशों में लगे हुए हैं।


अगर बाप-बेटे की इस जोड़ी को अपना कोई भी पक्ष रखना है तो हमारे दरवाज़े खुले हैं—  संपर्क नंबर: 7309728159

आप कभी भी हमसे संपर्क कर सकते हैं।

(पर यकीन मानिए, आप करेंगे नहीं! )