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50 करोड़ की जमीन की ठगी में पहली अग्रिम जमानत: वरुणापति को कोर्ट से बड़ी राहत, FIR में कई नामों से मचा था विवाद

करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन से जुड़े कथित ठगी और दस्तावेजों के निष्पादन के मामले में अभियुक्त वरुणापति उपाध्याय को न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई है। थाना रोहनियां, वाराणसी में दर्ज मु0अ0सं0 213/2026, धारा 318(4) बीएनएस के मामले में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 2698/2026 पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-06, वाराणसी के समक्ष सुनवाई हुई। 

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न्यायालय ने अभियुक्त को अग्रिम जमानत का लाभ दिया। प्रकरण में इसे पहली अग्रिम जमानत बताया जा रहा है।


कई विवादों के बीच सामने आया था पूरा मामला


मामले को लेकर कई बड़े विवादों के बीच FIR दर्ज होने के बाद यह प्रकरण सामने आया था। अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता के पति की उम्र करीब 65 वर्ष है और वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित होकर नियमित डायलिसिस करा रहे थे। आरोप है कि उनकी बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों का कथित लाभ उठाकर उनकी संपत्ति एवं आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करने की योजना बनाई गई।

FIR में कई नाम, नितेश राय ‘सोनू’ भी आरोपी


इस मामले में FIR और अभियोजन कथानक में कई व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इनमें नितेश राय ‘सोनू’ का नाम भी आरोपी के तौर पर बताया गया है। वहीं भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह का नाम भी मामले को लेकर मीडिया की सुर्खियों में रहा है। मामले में अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका को लेकर आरोप लगाए गए हैं और विवेचना प्रचलित बताई गई है।

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हालांकि, FIR में नाम होना या अभियोजन की ओर से आरोप लगाए जाना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। किसी भी व्यक्ति की भूमिका और दोष का अंतिम निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

अधिवक्ता विकास सिंह ने की प्रभावी पैरवी


अभियुक्त वरुणापति उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन के आरोपों, अभियुक्त की कथित भूमिका, पत्रावली में उपलब्ध तथ्यों और विवेचना की स्थिति को न्यायालय के समक्ष रखा।

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बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि केवल आरोप लगाए जाने से अपराध सिद्ध नहीं होता और प्रत्येक अभियुक्त की भूमिका का परीक्षण उपलब्ध साक्ष्यों एवं विधिक प्रावधानों के आधार पर किया जाना आवश्यक है। बचाव पक्ष ने अभियुक्त को गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए अग्रिम जमानत का लाभ दिए जाने की मांग की।

कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत


सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष प्रकरण की परिस्थितियों और अभियुक्त की कथित भूमिका को लेकर विस्तार से अपना पक्ष रखा। प्रभावी बहस के बाद न्यायालय ने वरुणापति उपाध्याय को अग्रिम जमानत का लाभ दिया।


प्रकरण की पत्रावली के अनुसार यह अभियुक्त की ओर से दाखिल प्रथम अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र था। करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बताई जा रही जमीन, FIR में सामने आए कई नाम और कथित दस्तावेजी लेन-देन के कारण यह मामला चर्चा में है। मामले में अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर विवेचना जारी बताई गई है।