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100 टोल रिपोर्ट, सैकड़ों नंबर और एक गाड़ी… ऐसे गिरफ्तार हुए तीन कफ सीरप माफिया

कफ सीरप तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन इनामी आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। तस्करी में शामिल आरोपियों द्वारा एप्पल फोन का इस्तेमाल किए जाने के कारण सर्विलांस टीम को शुरुआती दौर में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन पुलिस ने रणनीति बदलते हुए जांच को नई दिशा दी।


डिजिटल फुटप्रिंट के साथ-साथ आरोपियों के करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया गया। इसके अलावा आरोपियों की गाड़ियों की मूवमेंट को रडार पर लेते हुए देशभर के टोल टैक्स प्लाजा से रिपोर्ट मंगाई गई। करीब 100 से अधिक टोल रिपोर्ट और सैकड़ों मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के बाद पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे।

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जांच में आजमगढ़ के नरवे गांव निवासी विकास सिंह नरवे, वाराणसी के मैदागिन निवासी आकाश पाठक और जौनपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र के ख्वाजा दोस्त निवासी अंकित की दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, जैसलमेर सहित कई शहरों में आवाजाही सामने आई। पुलिस से बचने के लिए आरोपी राह चलते लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर अपनों से संपर्क करते रहे, लेकिन संदिग्ध नंबरों की ट्रैकिंग से पुलिस लगातार उनके करीब पहुंचती गई।

जांच के दौरान पुलिस का फोकस आकाश पाठक की गाड़ी पर गया, जिसकी लोकेशन सिद्धार्थनगर में सटीक रूप से ट्रेस की गई। इसी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इनामी आरोपियों को दबोच लिया। डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि कड़ी मेहनत और तकनीकी विश्लेषण के बाद यह सफलता मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि 25-25 हजार रुपये के इनामी दिवेश जायसवाल, अमित जायसवाल और मनोज यादव भी पुलिस के रडार पर हैं और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

माफिया कनेक्शन उजागर, STF और ED की एंट्री से तस्करों की घेराबंदी


18 अक्टूबर को सोनभद्र पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सीरप से भरे दो ट्रकों को पकड़कर 1,19,675 शीशियां बरामद की थीं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद झारखंड के रांची में छापेमारी कर 13,400 पेटी कफ सीरप बरामद की गई।


इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने चिप्स और चूना के नाम पर कफ सीरप की तस्करी करने वाले गिरोह का खुलासा किया। एक मछली गोदाम में छापेमारी के दौरान पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) स्थित दवा कंपनियों के नाम से लगभग 3.40 करोड़ रुपये मूल्य की 1,57,350 शीशियां बरामद कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

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जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सौरव त्यागी ने फर्जी पतों पर सात दवा लाइसेंस हासिल कर दिल्ली की फर्म से माल खरीदकर बंगाल, ओडिशा और असम तक सप्लाई की। पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम सामने आए, जिसके बाद कुल 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

पूर्वांचल से जुड़े तस्करी के तार, दो हजार करोड़ तक का अंदेशा


तस्करी के तार पूर्वांचल से जुड़ने और एक माफिया की संलिप्तता सामने आने के बाद सियासी हलकों में भी हलचल तेज हो गई। सरकार के संज्ञान लेने के बाद एसटीएफ को जांच में शामिल किया गया, जिसके बाद जौनपुर निवासी अमित सिंह टाटा, चंदौली के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।


शुरुआती जांच में तस्करी का आंकड़ा 200 से 250 करोड़ रुपये आंका गया था, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 2000 करोड़ रुपये की तस्करी की आशंका जताते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसके साथ ही आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी तेज कर दी गई है।