मणिकर्णिका घाट तोड़फोड़ मामला दिल्ली तक गूंजा, संसद के बाहर सपा का प्रदर्शन
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा सहित अन्य प्राचीन संरचनाओं को तोड़े जाने के आरोप को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने मंगलवार को संसद भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सपा नेताओं ने इस कार्रवाई को काशी की प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत पर सीधा हमला बताते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
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सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर लंबे समय से स्थापित महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और अन्य मूर्तियों को विकास के नाम पर तोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि काशी की ऐतिहासिक पहचान को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।
राम गोपाल यादव ने कहा, “बनारस में मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ की गई है। शुरू से ही वहां महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा थी, अन्य प्रतिमाएं भी थीं, जिन्हें तोड़ दिया गया। बनारस की अपनी एक प्राचीन संस्कृति है—उसकी गलियां, उसके मंदिर, उसकी परंपराएं—इन सबका विध्वंस किया जा रहा है।”
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उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वाराणसी से सांसद हैं, इसके बावजूद काशी की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। “बनारस की जनता हमेशा से चाहती है कि ऐसा कोई परिवर्तन न हो, जिससे उसकी संस्कृति समाप्त हो जाए, लेकिन आज बनारस की पहचान को मिटाने की कोशिश हो रही है,” उन्होंने कहा।
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सपा सांसदों ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, दोषियों पर कार्रवाई करने और काशी की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाइयां नहीं रुकीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


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