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पूर्वांचल का अगला BKD बनने का ख्वाब… लेकिन STF की गोलियों में ढेर हुआ 10 हत्याओं का आरोपी सुपारी किलर बनारसी यादव

रात का घना अंधेरा, चौबेपुर रोड पर पसरा सन्नाटा और हवा में तनाव… किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले 30 सेकंड में पूर्वांचल के जरायम जगत का एक बड़ा नाम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। एक लाख का इनामी और 10 हत्याओं का आरोपी सुपारी किलर बनारसी यादव STF के साथ मुठभेड़ में मारा गया।

आधी रात के बाद STF को पुख्ता सूचना मिली थी कि बनारसी यादव इसी रास्ते से गुजरने वाला है। टीम ने घेराबंदी कर जैसे ही संदिग्ध बाइक को रुकने का इशारा किया, इंस्पेक्टर की आवाज सन्नाटे को चीरती हुई गूंजी— “पुलिस ने तुम्हें घेर लिया है, हथियार डालकर सरेंडर कर दो।”

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सरेंडर की चेतावनी सुनते ही बनारसी यादव बौखला गया। उसने पिस्तौल निकालकर STF टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। ठांय-ठांय की आवाज से इलाका दहल उठा। दो गोलियां जवानों के बेहद करीब से गुजर गईं। इसके बाद STF ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी फायरिंग की।

करीब पांच राउंड की आमने-सामने फायरिंग के बाद अचानक एक चीख सुनाई दी और गोलियों की आवाज थम गई। टॉर्च की रोशनी में देखा गया कि बनारसी यादव खून से लथपथ सड़क पर गिरा पड़ा है। उसके शरीर में दो गोलियां लगी थीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मौके से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं।

10 हत्याएं, 21 मुकदमे और 1 लाख का इनाम

गाजीपुर जिले के करंडा का रहने वाला बनारसी यादव पुलिस रिकॉर्ड में बेहद शातिर अपराधी था। उस पर 10 हत्याओं समेत कुल 21 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 

बनारसी यादव

सारनाथ थाना क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

50 करोड़ की जमीन बना कत्ल की वजह

करीब पांच महीने पहले 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में प्रॉपर्टी डीलर योगेंद्र ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या की सुपारी दी थी। इस सुपारी के लिए 5 लाख रुपये की डील तय हुई। 

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21 अगस्त 2025 को बनारसी यादव ने अपने साथियों—फौजी अरविंद यादव और विशाल—के साथ मिलकर दिनदहाड़े महेंद्र गौतम की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पूर्वांचल के आपराधिक इतिहास में बनारसी यादव लंबे समय तक एक रहस्य बना रहा। पुलिस के पास उसका नाम था, लेकिन चेहरा नहीं। वह न मोबाइल इस्तेमाल करता था, न एक जगह टिकता था। 

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लगातार ठिकाने बदलना और संपर्क के पुराने तरीकों से दूरी बनाए रखना उसकी खास रणनीति थी।

दूसरा BKD बनने की चाह

सूत्रों के मुताबिक बनारसी यादव खुद को पूर्वांचल का अगला BKD बनते देख रहा था। बड़े माफियाओं के इशारे पर सुपारी किलिंग कर उसने अपनी पहचान बनाई, लेकिन STF के साथ हुई इस मुठभेड़ में उसका वह सपना भी गोलियों के साथ खत्म हो गया।