सोना छोड़ अब 'झाल मुढ़ी' बेचने को मजबूर हुए सोनार, पीएम मोदी की अपील का अनोखा विरोध
धर्म और राजनीति की नगरी काशी में इन दिनों एक अनोखा विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। वाराणसी के जिला मुख्यालय पर स्वर्णकार समाज के लोगों ने अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए एक नायाब तरीका अपनाया है। यहाँ पुश्तैनी सोने का कारोबार करने वाले लोग अब 'झाल मुढ़ी' (भेल) बेचने को मजबूर हो गए हैं।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों जनता से अपील की थी कि वे एक वर्ष तक सोना और सोने के आभूषण न खरीदें।
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इस अपील का सीधा असर अब स्वर्णकारों, कारीगरों और छोटे विक्रेताओं के चूल्हे पर पड़ने लगा है।
स्वर्णकार समाज का कहना है कि जब लोग दुकानों पर खरीदारी के लिए आएंगे ही नहीं,
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तो उनका परिवार और उनसे जुड़े हजारों कारीगर कैसे जीवित रहेंगे।
वाराणसी जिला मुख्यालय पर शुभम सेठ 'गोलू' नामक एक स्वर्णकार ने झाल मुढ़ी की दुकान लगाई। शुभम का कहना है कि:
"मैं एक सुनारी कार्यकर्ता, विक्रेता और कारीगर हूँ। प्रधानमंत्री जी की अपील के बाद हमारे व्यापार पर गहरा संकट आ गया है। हमने झाल मुढ़ी की दुकान इसलिए चुनी क्योंकि हमारे सांसद और प्रधानमंत्री जी को यह काफी प्रिय है और आजकल ट्रेंडिंग में भी है।"


