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IPL फाइनल में 25 करोड़ का सट्टा, वाराणसी से चल रहा था इंटरनेशनल नेटवर्क; मुंबई के 9 बुकी समेत 11 गिरफ्तार

आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान करोड़ों रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और कैंट थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में टकटकपुर क्षेत्र स्थित एक फ्लैट से 11 शातिर सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया गया है। 

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गिरफ्तार आरोपियों में 9 मुंबई और 2 वाराणसी के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि केवल आईपीएल फाइनल मैच के दिन ही करीब 25 करोड़ रुपये का सट्टा इस नेटवर्क के माध्यम से लगाया गया था।

बनारस को बनाया था सुरक्षित ठिकाना

एसओजी प्रभारी गौरव सिंह के अनुसार दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में पुलिस की सख्ती के कारण इस गिरोह ने वाराणसी को अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया था। आरोपियों ने कैंट क्षेत्र के टकटकपुर स्थित एक रिहायशी कॉलोनी में फ्लैट किराए पर लेकर पूरे आईपीएल सीजन के दौरान अपना नेटवर्क संचालित किया। बाहरी तौर पर सामान्य फ्लैट दिखाई देने वाले इस ठिकाने से देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चलाया जा रहा था।


 छापेमारी में मिला इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा


रविवार देर रात पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर फ्लैट पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान कमरे में कई लैपटॉप और मोबाइल फोन चालू हालत में मिले, जिन पर सट्टे के भाव और लेन-देन का रिकॉर्ड संचालित हो रहा था।

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पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में लैपटॉप, एंड्रॉयड मोबाइल फोन, की-पैड फोन, टैबलेट, वॉयस रिकॉर्डर, इंटरनेट राउटर तथा डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा नकदी, विभिन्न बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल करोड़ों रुपये के लेन-देन में किया जा रहा था।


टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए फैला रखा था नेटवर्क


पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी सामान्य फोन कॉल के बजाय डिजिटल और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। इसके लिए टेलीग्राम और व्हाट्सऐप पर कई सीक्रेट और वीआईपी ग्रुप बनाए गए थे। इन ग्रुप्स के माध्यम से महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों के सटोरियों को जोड़ा गया था और मैच दर मैच करोड़ों रुपये का दांव लगाया जाता था।


मुख्य सरगना की तलाश में जुटी पुलिस


पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डेटा, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। जांच एजेंसियां इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।


पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है।