gnews नागपंचमी पर काशी में गूंजा छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग ले लो...’, सात नागों के दर्शन-पूजन की रही मान्यता - The Varanasi News
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नागपंचमी पर काशी में गूंजा छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग ले लो...’, सात नागों के दर्शन-पूजन की रही मान्यता


काशी में नागों की पूजा का पर्व नागपंचमी सोमवार को सावन महीने के तीसरे सोमवार के दिन सिद्धयोग में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। नागपंचमी के मौके पर काशी की गलियों में सुबह से ही ‘बड़े गुरु का नाग ले लो, छोटे गुरु का नाग ले लो...’ की आवाजें गूंजती रहीं। श्रद्धालुओं ने नागदेवता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, खुशहाली और वंशवृद्धि की कामना की।

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काशी में नागपंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है। काशी महात्म्य के अनुसार यहां शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, कम्बल, अश्वेतर और शंखचूड़ समेत सात नागों के दर्शन-पूजन का विधान बताया गया है। हर वर्ष श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन काशी में नागों से संबंधित विभिन्न शिवलिंगों के दर्शन और पूजन की परंपरा निभाई जाती है।

दारुकावन क्षेत्र के जैतपुरा में शिवगण कर्कोटक नाग द्वारा स्थापित शिवलिंग कर्कोटकेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। काशी खंड में कर्कोटक नाग, कर्कोट वापी और कर्कोटकेश्वर लिंग का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि कर्कोटकेश्वर महादेव का पूजन और कर्कोटक नाग की आराधना करने से श्रद्धालु को नागलोक में सम्मान प्राप्त होता है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कर्कोटक नाग के दर्शन और कर्कोट वापी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों को नागदेवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और विषैले प्रभावों से रक्षा होती है।

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कुछ पुराणों में नागों के प्रमुख पांच कुल—अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक और पिंगला बताए गए हैं। वहीं अन्य पुराणों में नागों के अष्टकुल का वर्णन मिलता है, जिसमें वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंख, चूड़, महापद्म और धनंजय का उल्लेख है।


नागपंचमी के अवसर पर काशी के विभिन्न नाग मंदिरों और नागों से संबंधित धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी। लोगों ने नागदेवता को दूध, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की। मान्यता है कि नागपंचमी पर नागदेवता की आराधना करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और वंशवृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।