सेनेटरी पैड-सर्फ दिलाने के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी, आरोपित राजेश अग्रवाल को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
सेनेटरी पैड और डिटर्जेंट पाउडर सहित अन्य सामान उपलब्ध कराने के नाम पर धोखाधड़ी कर करीब 61.40 लाख रुपये समेत एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़पने के मामले में आरोपित को अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने विश्वेश्वरगंज, कोतवाली निवासी आरोपित राजेश अग्रवाल को अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने आदेश दिया कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में आरोपित को एक लाख रुपये की जमानत एवं बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत में पक्ष रखा।
![]() |
| विज्ञापन |
इसी दौरान उनकी मुलाकात किराना दुकान से संबंधित सामान के विक्रेता राजेश अग्रवाल से हुई। प्राथमिकी के मुताबिक, राजेश अग्रवाल ने वादी को बताया कि उनकी राजेश ट्रेडिंग कंपनी और श्री श्याम ट्रेडिंग कंपनी के पास प्रोवीज सेनेटरी पैड और घड़ी सर्फ की एजेंसी है तथा वे इन कंपनियों के एजेंट के रूप में कारोबार करते हैं। आरोप है कि उन्होंने वादी को इन उत्पादों का कारोबार शुरू करने पर बाजार से काफी कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
इसके लिए करीब 25 लाख रुपये अग्रिम देने की बात कही गई। आरोप के मुताबिक, बताया गया कि अग्रिम राशि कंपनी को ट्रांसफर कर कम कीमत पर माल मंगाने में इस्तेमाल की जाएगी। इस भरोसे में आकर वादी और उनके परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग खातों तथा काशी बाजार फर्म के खाते से आरोपितों के बताए गए फर्म और निजी खातों में रकम भेजनी शुरू कर दी।
वादी का आरोप है कि राजेश अग्रवाल, शाश्वत अग्रवाल, रजनी अग्रवाल और लाडो के कहने पर अलग-अलग माध्यमों से करीब 61.40 लाख रुपये समेत कुल एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम उनके बताए गए खातों में भेजी गई। इसके बावजूद कई दिन बीत जाने के बाद भी वादी और उनके परिवार को माल उपलब्ध नहीं कराया गया।
![]() |
| विज्ञापन |
वादी ने आरोप लगाया कि 3 जनवरी 2026 को वह अपने पुत्र उमाकांत चौधरी के साथ राजेश और रजनी अग्रवाल के शंकुलधारा स्थित मकान पर पहुंचे थे। वहां राजेश अग्रवाल, शाश्वत अग्रवाल, रजनी अग्रवाल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति मौजूद था। आरोप है कि वहां उन्हें और उनके पुत्र को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई और वहां से भगा दिया गया।
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राजेश अग्रवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने आरोपित को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।


