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दिवाली-छठ पर वाराणसी आना विदेश जाने से भी महंगा, कई रूट्स पर 23000 तक पहुंचा हवाई किराया

 दशहरा, दीपावली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के बीच अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों को इस बार महंगे हवाई किराए का सामना करना पड़ रहा है। विमानन ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने-जाने वाले यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि त्योहारों के दौरान कई प्रमुख शहरों से वाराणसी आने का हवाई किराया सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना तक पहुंच गया है।

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इंडिगो के बाद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से भी फ्यूल चार्ज बढ़ाए जाने से हवाई सफर महंगा हो गया है। विमानन कंपनियां ईंधन की बढ़ती लागत को किराए के जरिए संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग के कारण टिकटों की कीमतों में और उछाल देखने को मिल रहा है।


मुंबई से वाराणसी का किराया 23 हजार रुपये के करीब


दीपावली पर घर आने के लिए हवाई टिकट बुक करना लोगों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। छह नवंबर के लिए मुंबई से वाराणसी आने वाली उड़ानों के किराए पर नजर डालें तो एयर इंडिया का टिकट करीब 23 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, इंडिगो और अकासा एयर की उड़ानों का किराया भी लगभग 16 हजार से 18 हजार रुपये के बीच बताया जा रहा है।

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यानी मुंबई से काशी आने वाले यात्रियों को एक तरफ के हवाई सफर के लिए ही हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। सामान्य दिनों की तुलना में यह किराया कई गुना अधिक बताया जा रहा है।


दिल्ली और हैदराबाद से आने का किराया भी महंगा


महंगे हवाई किराए का असर केवल मुंबई से आने वाले यात्रियों तक सीमित नहीं है। छह नवंबर को दिल्ली से वाराणसी आने वाली उड़ानों का किराया भी लगभग 14 हजार से 19 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, हैदराबाद से वाराणसी आने के लिए यात्रियों को करीब 15 हजार से 18 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।


दूसरी ओर, शारजाह से वाराणसी आने वाले यात्रियों के लिए भी हवाई सफर महंगा हो गया है। यहां से आने का किराया 35 हजार रुपये से अधिक बताया जा रहा है। हालांकि, टिकटों की कीमतें एयरलाइन, उड़ान के समय, सीटों की उपलब्धता और बुकिंग की तारीख के अनुसार बदल सकती हैं।


एक महीने पहले बुकिंग पर भी राहत नहीं


ट्रैवल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान हवाई टिकटों की मांग काफी बढ़ जाती है। दीपावली और छठ पर बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं। ऐसे में प्रमुख शहरों से वाराणसी आने वाली उड़ानों में सीटों की मांग बढ़ने से किराए में तेजी आती है।

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कारोबारियों के मुताबिक, यदि लगभग एक महीने पहले टिकट बुक करने पर भी किराया इतना अधिक है, तो त्योहार नजदीक आने के साथ कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में आखिरी समय पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है।


प्रवासियों के त्योहार का बजट बिगड़ा


रोजगार और कारोबार के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और दूसरे शहरों में रहने वाले पूर्वांचल के हजारों लोगों के लिए दीपावली और छठ अपने परिवार के साथ मनाने का खास अवसर होता है। लेकिन हवाई किराए में बढ़ोतरी के कारण घर लौटने का खर्च बढ़ गया है।


परिवार के कई सदस्यों के साथ यात्रा करने वालों का बजट और अधिक प्रभावित हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को ट्रेन, बस और हवाई सफर के खर्च की तुलना करके यात्रा की योजना बनानी पड़ सकती है।


काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर भी असर


त्योहारों के दौरान वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन और धार्मिक पर्यटन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। हवाई किराए में बढ़ोतरी का असर इन यात्रियों की यात्रा योजना पर भी पड़ सकता है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से आने वाले यात्रियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से काशी पहुंचने वालों को भी अधिक खर्च करना पड़ सकता है।


कुल मिलाकर, त्योहारों के इस सीजन में महंगे हवाई टिकट घर लौटने वाले प्रवासियों और काशी आने वाले यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। यदि टिकटों की मांग लगातार बढ़ती रही, तो त्योहार नजदीक आने पर यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।