काशी में ‘चार कंधों’ का अनोखा स्टार्टअप, अपनों ने छोड़ा साथ तो पैसे लेकर अंतिम यात्रा तक पहुंचा रहे शव
मोक्ष की नगरी काशी से बदलते सामाजिक रिश्तों की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो भावुक करने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करती है। यहां अब अंतिम यात्रा के लिए ‘चार कंधे’ भी किराए पर उपलब्ध हैं। कुछ युवाओं ने इसे एक अनोखे स्टार्टअप का रूप दे दिया है, जिसके जरिए उन लोगों को सहारा दिया जा रहा है, जिनकी अंतिम यात्रा में साथ देने के लिए परिवार या रिश्तेदार मौजूद नहीं होते।
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ऐसे समय में कुछ नौजवान आगे आए। उन्होंने पैसे लेकर शव को अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने और अंतिम यात्रा में कंधा देने की जिम्मेदारी संभाली। यही व्यवस्था धीरे-धीरे एक ऐसे अनोखे ‘चार कंधों के स्टार्टअप’ में बदलती जा रही है, जहां सेवा, रोजगार और इंसानियत तीनों एक साथ दिखाई देते हैं।
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मोबाइल की दुनिया में रिश्तों से दूर होता समाज
इन युवाओं के मुताबिक आज के दौर में लोग अपनी नौकरी, निजी जिंदगी और मोबाइल की दुनिया में इतने व्यस्त हो गए हैं कि कई बार किसी के अंतिम समय में साथ खड़े होने के लिए भी समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में अंतिम यात्रा के लिए ‘चार कंधों’ की जरूरत पड़ना समाज में बदलते रिश्तों की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
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बाजार की जरूरत, सामाजिक मजबूरी या इंसानियत की नई मिसाल—‘चार कंधों’ का यह स्टार्टअप इन तीनों के बीच खड़ा नजर आता है। लेकिन इतना जरूर है कि जिन लोगों की अंतिम यात्रा में अपनों का साथ नहीं मिलता, उनके लिए ये युवा आखिरी सफर में किसी अपने से कम नहीं साबित हो रहे हैं।



