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कड़ी सुरक्षा के बीच निकली बाबा की पालकी, रंगभरी एकादशी पर काशी हो उठी गुलालमय

धर्म और आस्था की नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर शुक्रवार को भक्ति, उल्लास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महंत आवास स्थित टेढ़ी नीम से बाबा की भव्य पालकी निकली तो पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। डमरुओं की ध्वनि और गुलाल की उड़ती रंगत के साथ काशी होली के रंग में सराबोर हो गई।

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रंगभरी एकादशी को बाबा के गौने की बारात के रूप में मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि विवाह के बाद इस दिन भगवान अपने भक्तों के बीच रंग खेलने निकलते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े महंत आवास से बाबा की पालकी शोभायात्रा के रूप में निकाली गई।

एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाए हाजिरी

मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह मंगला आरती के बाद से दोपहर तक एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। भक्तों की लंबी कतारें दूर-दूर तक लगी रहीं। बाबा और मां गौरा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला।

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हालांकि कई भक्तों को बाबा और मां गौरा को पहला गुलाल लगाने का अवसर नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने महंत आवास स्थित टेढ़ी नीम पहुंचकर दर्शन किए और अपनी श्रद्धा अर्पित की।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम


रंगभरी एकादशी को देखते हुए प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती के साथ ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी।

लोकाचार और परंपरा का जीवंत स्वरूप

रंगभरी एकादशी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। भक्तों और भगवान के बीच लोकाचार की परंपरा इस दिन विशेष रूप से देखने को मिलती है। गुलाल, अबीर और भक्ति के रंगों से सजी काशी की गलियां इस पर्व की भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं।

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भक्तों ने रंगों के माध्यम से बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश भी पूरे शहर में गूंजता रहा।

काशी की होली: आस्था और उल्लास का संगम

काशी में होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। रंगभरी एकादशी के साथ ही यहां होली की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। इस वर्ष भी काशी की होली रंगों, उत्साह और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में दिखाई दी, जिसने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।