होली का हुड़दंग पड़ा भारी: 500 घायल BHU ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, 300 की हड्डियां टूटीं, 150 के जबड़े चटके
रंगों के पर्व होली की मस्ती कई लोगों के लिए भारी पड़ गई। शराब पीकर तेज रफ्तार में वाहन चलाने, सड़क हादसों और आपसी मारपीट की घटनाओं के चलते बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। हालात यह रहे कि बीएचयू ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी पूरी तरह भर गई और कई मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर करना पड़ा।
होलिका दहन से लेकर होली तक तीन दिनों के भीतर पूर्वांचल और बिहार के अलग-अलग जिलों से 500 से अधिक घायल मरीज इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इनमें से अधिकांश की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच बताई गई है, जबकि करीब 100 घायल 40 से 55 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
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डॉक्टरों के अनुसार शराब के नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाने और झगड़े-मारपीट की घटनाओं में करीब 300 लोगों के हाथ, पैर और कमर की हड्डियां टूट गईं, जिन पर प्लास्टर चढ़ाया गया। वहीं करीब 150 लोगों के जबड़े टूटने के मामले सामने आए, जबकि लगभग 50 लोगों को मामूली चोटें आईं।
घायलों में कई ऐसे भी थे जिनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर, हाथों में गहरी चोट या कमर में गंभीर चोट पाई गई। कुछ मरीजों की जांच में रीढ़ की हड्डी टूटने की भी पुष्टि हुई है। डॉक्टरों ने कई गंभीर मरीजों को सर्जरी की सलाह दी है।
होली के दौरान सड़क हादसों और मारपीट की घटनाओं के कारण जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की इमरजेंसी भी मरीजों से भरी रही। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की इमरजेंसी में भी दो दिनों के भीतर 20 से अधिक घायल इलाज के लिए पहुंचे।
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इस दौरान बिहार से लेकर वाराणसी तक एंबुलेंस लगातार दौड़ती रहीं। बिहार के सासाराम, भभुआ, मोहनिया, कैमूर, कुदरा और औरंगाबाद सहित कई इलाकों से करीब 100 घायलों को एंबुलेंस से बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया। 108 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी विकास तिवारी के अनुसार, दो दिनों में 120 से अधिक घायलों को सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।
ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि होली को देखते हुए इमरजेंसी में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष टीम तैनात की गई थी। सभी घायलों की जांच और जरूरत के अनुसार सर्जरी की जा रही है तथा डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है।


