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काशी में साल में एक दिन ही होते हैं माँ श्रृंगार गौरी के दर्शन, चतुर्थी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि के चतुर्थ दिन मां श्रृंगार गौरी की आराधना का विशेष महत्व देखने को मिला। इस पावन अवसर पर काशी के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने परंपरागत रूप से मां श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन किए।


काशी की प्राचीन परंपरा के अनुसार चैत्र नवरात्र में नवदुर्गा के साथ-साथ नौ गौरी के दर्शन का भी विशेष महत्व है। इसी क्रम में चतुर्थ दिन मां श्रृंगार गौरी के दर्शन किए जाते हैं। मान्यता है कि मां के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और महिलाओं का सुहाग अखंड बना रहता है, यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं विशेष रूप से दर्शन के लिए पहुंचीं।

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मां श्रृंगार गौरी का विग्रह ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पर विराजमान है। बताया जाता है कि वर्ष 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद यहां नियमित दर्शन पर रोक लग गई थी, जिसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 2021 में पांच हिंदू महिलाओं द्वारा नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति के लिए याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर सर्वे भी कराया गया। इस मामले में हिंदू पक्ष तहखाने में मंदिर होने का दावा करता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता है। फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित है।

आज के दिन वर्ष में एक बार ही मां श्रृंगार गौरी के दर्शन की परंपरा के चलते भारी भीड़ उमड़ी। दर्शन के लिए करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ दर्शन किए। प्रशासन और मंदिर न्यास द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।

इस अवसर पर वादिनी महिलाओं—मंजू व्यास, रेखा पाठक, सीता साहू और लक्ष्मी देवी ने भी मां के दर्शन किए।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि परंपरा के अनुसार वर्ष में केवल एक दिन मां श्रृंगार गौरी का दर्शन होता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसे देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। न्यास द्वारा दर्शन-पूजन, श्रृंगार सामग्री और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

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वहीं श्रद्धालु गुलशन कपूर ने बताया कि वर्षों बाद अब लगातार मां के दर्शन की व्यवस्था हो रही है, जिससे भक्तों में खासा उत्साह है। उन्होंने कहा कि वर्ष में केवल एक दिन मिलने वाले इस अवसर को लेकर लोगों में विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिलता है।