चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन माँ मुखनिर्मलिका गौरी के दरबार में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही भारतीय नववर्ष 'विक्रम संवत 2083' का उल्लासपूर्वक शुभारंभ हो गया है। धर्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन माता के मुखनिर्मलिका गौरी स्वरूप के दर्शन की प्राचीन परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही गंगा के पावन तटों से लेकर मंदिरों की गलियों तक 'जय माता दी' के उद्घोष गुंजायमान हैं।
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वाराणसी के गाय घाट स्थित माँ मुखनिर्मलिका गौरी के मंदिर में आज भोर से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के प्रथम दिन माँ के इस विग्रह का दर्शन करने से साधक का मन और वाणी दोषमुक्त हो जाते हैं।
मंदिर के पुजारी के अनुसार, "माँ मुखनिर्मलिका का अर्थ है मुख को निर्मल करने वाली। जो भक्त आज के दिन गंगा स्नान कर माँ की चौखट पर माथा टेकता है, उसकी सभी मानसिक व्याधियां दूर हो जाती हैं।"
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प्रशासन द्वारा नवरात्रि के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गाय घाट और हनुमान फाटक क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। इसके साथ ही दशाश्वमेध और अन्य प्रमुख घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण जल पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं।


