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सुजीत बेलवा, विनीत सिंह और पप्पू भौकाली को कैसे मिला शस्त्र लाइसेंस? 19 बाहुबलियों पर हाईकोर्ट ने तलब की पूरी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को हथियार लाइसेंस जारी किए जाने के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से विस्तृत जवाब तलब करते हुए प्रदेश के 19 प्रभावशाली और चर्चित व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है।


न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करता है। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि आत्मरक्षा के नाम पर खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन कानून के शासन और सामाजिक शांति के खिलाफ है।

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अदालत ने कहा कि गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 20 मई 2026 को दाखिल हलफनामे से यह साफ हुआ है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में शस्त्र लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और हस्तांतरण के मामलों में सरकारी आदेशों तथा आर्म्स एक्ट 1959 के नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने याद दिलाया कि 23 मार्च 2026 को जारी आदेश में अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका अनुपालन नहीं हुआ।


प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस


कोर्ट के समक्ष पेश आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। वहीं 23,407 आवेदन विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं और जिलाधिकारियों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें मंडलायुक्तों के समक्ष विचाराधीन हैं।


चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि प्रदेश में 20,960 परिवार ऐसे हैं जिनके पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, जबकि 6,062 मामलों में ऐसे लोगों को भी लाइसेंस जारी किए गए हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।


कोर्ट ने मांगा नामवार और थाना स्तर तक का विवरण


हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सभी लाइसेंस धारकों का जिला, थाना और नामवार विवरण अदालत में पेश किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं या नहीं।


अदालत ने कहा कि प्रशासनिक कार्यवाही में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुशासन की मूल आवश्यकता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के संबंध में स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और कई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं।


इन 19 लोगों की मांगी गई जानकारी


हाईकोर्ट ने जिन लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी तलब की है, उनमें रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेन्द्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इन्द्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह और डॉ. उदय भान सिंह शामिल हैं।

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कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन सभी व्यक्तियों के सही पते, उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों, हथियार लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित पूरी जानकारी शपथपत्र के साथ उपलब्ध कराई जाए।


26 मई को होगी अगली सुनवाई


हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह), सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और एसएसपी को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने कोर्ट से कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं छिपाई है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को निर्धारित की गई है।