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आईजीएनसीए वाराणसी में ‘समर्पण’ पुस्तक पर परिचर्चा, पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर हुआ मंथन

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय केन्द्र वाराणसी में गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन एवं विचारों पर आधारित पुस्तक ‘समर्पण’ पर पुस्तक परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्वानों और चिंतकों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन-दर्शन, एकात्म मानववाद तथा उनके विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय ज्ञान-परंपरा के विद्वान एवं सामाजिक चिंतक विद्याप्रसाद मिश्र रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य रामाशीष सिंह ने की। पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।


कार्यक्रम की शुरुआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद भारत माता एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ हुआ। बृहस्पति पाण्डेय ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।


आईजीएनसीए वाराणसी के निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की विषयवस्तु एवं उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने लेखक सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया।


पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार ने अपनी नवप्रकाशित पुस्तक ‘समर्पण’ की लेखन प्रक्रिया, प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके उपरांत उपस्थित अतिथियों द्वारा पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया गया।


मुख्य अतिथि विद्याप्रसाद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक लेखक और प्रकाशक के निरंतर परिश्रम एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन में निहित शिवत्व तथा उनके एकात्म मानववाद के दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पुस्तक उनके विचारों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

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अध्यक्षीय उद्बोधन में रामाशीष सिंह ने कहा कि जब आदर्श व्यवहार में उतरते हैं, तब दीनदयाल जैसे व्यक्तित्वों का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता और लोकमंगल की भावना पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन का मूल आधार रही है तथा उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।


कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनीकांत त्रिपाठी ने किया, जबकि नागपुर से आए स्वप्निल जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।


इस अवसर पर तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, दिल्ली, लखनऊ और आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वान, चिंतक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। साथ ही काशी के समाजसेवी, कला-प्रेमी, बुद्धिजीवी तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की।