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ज्ञानवापी पर सुप्रीम कोर्ट की सुलह कोशिश नाकाम! मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता से किया किनारा

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद को आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की पहल को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत की ओर से 'समाधान समारोह-2026' के तहत 14 जुलाई को वाराणसी में प्रस्तावित प्री-कंसिलेशन (पूर्व-सुलह वार्ता) बैठक में शामिल होने से मुस्लिम पक्ष ने साफ इनकार कर दिया है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह इस विवाद का समाधान अदालत के बाहर किसी मध्यस्थता, लोक अदालत या समझौते के माध्यम से नहीं चाहती और अपनी कानूनी लड़ाई नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी रखेगी।

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के कुछ संवेदनशील धार्मिक एवं भूमि विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के उद्देश्य से 'समाधान समारोह-2026' की शुरुआत की है। इसी पहल के तहत ज्ञानवापी मामले को 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत में भेजने का सुझाव दिया गया था। इसके पहले 14 जुलाई को वाराणसी में दोनों पक्षों के बीच पूर्व-सुलह वार्ता आयोजित करने की योजना बनाई गई थी।

 

मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का कहना है कि ज्ञानवापी विवाद केवल संपत्ति का मामला नहीं, बल्कि संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील प्रकरण है। उनका कहना है कि इस मामले में पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 और मालिकाना हक जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न जुड़े हुए हैं, जिनका फैसला केवल अदालत ही कर सकती है। इसलिए लोक अदालत या मध्यस्थता के जरिए समाधान स्वीकार्य नहीं है।

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कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी परिस्थिति में मस्जिद पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में किसी समझौता वार्ता में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं बनता।

दिलचस्प बात यह है कि मध्यस्थता के प्रस्ताव को लेकर हिंदू पक्ष ने भी सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है। हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी और पैरोकारों का कहना है कि वे किसी प्रकार के समझौते या मध्यस्थता के पक्ष में नहीं हैं।


हिंदू पक्ष का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग से जुड़े साक्ष्य उनके दावे को मजबूत करते हैं। उनका कहना है कि वे किसी बीच के रास्ते की बजाय पूरी ज्ञानवापी भूमि पर मंदिर का अधिकार चाहते हैं।

दोनों पक्षों द्वारा मध्यस्थता प्रक्रिया से दूरी बनाए जाने के बाद 14 जुलाई को प्रस्तावित प्री-कंसिलेशन बैठक के सफल होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।