काशी में गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल: मुस्लिम शिष्यों ने उतारी गुरु की आरती, पातालपुरी मठ में लिया आशीर्वाद
काशी में भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा का एक अनूठा और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। पातालपुरी मठ में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम समाज और आदिवासी समुदाय के लोगों ने मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज की विधिवत आरती उतारी, चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कई नए लोगों ने गुरु दीक्षा भी ग्रहण की। कार्यक्रम ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा का संदेश दिया।
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काशी में गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल: मुस्लिम शिष्यों ने उतारी गुरु की आरती, पातालपुरी मठ में लिया आशीर्वाद#TheVaranasiNews #Varanasi #VaranasiNews pic.twitter.com/IO7OVIgvrZ
— The Varanasi News (@thevaranasinews) July 29, 2026
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामपंथ के पंथाचार्य डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा सदैव धर्म और जाति से परे रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न प्रकार के विभाजनों से गुजर रहा है, ऐसे में यह परंपरा सामाजिक समरसता और एकता का मजबूत आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के प्रति जागरूक हो रहा है, जिससे समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना मजबूत हो रही है।
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इस अवसर पर दलित विचारक ज्ञान प्रकाश, आदिवासी समाज के धर्मगुरु द्वारिका प्रसाद तथा मुस्लिम समाज के सामाजिक नेता नौशाद अहमद दूबे ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज को रामनामी दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और सभी ने सामाजिक सद्भाव, गुरु-शिष्य परंपरा तथा भारतीय संस्कृति की एकता के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


