44 लाख के फ्लैट की धोखाधड़ी में छह के खिलाफ परिवाद, राज्यमंत्री के नाम से धमकाने का आरोप
44 लाख रुपये के फ्लैट की धोखाधड़ी के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश प्रदीप कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी, जब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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प्रदीप का आरोप है कि फ्लैट की खरीद के लिए उन्होंने कंपनी के निदेशक अविनाश उपाध्याय को 25 लाख रुपये दिए थे। इसके संबंध में 20 अगस्त 2020 को नोटरी समझौता भी किया गया था। समझौते में राघवेंद्र प्रताप सिंह, राम द्विवेदी और विवेक उपाध्याय को गवाह बनाया गया था। इसके बाद 3 सितंबर 2020 को फ्लैट में गृह प्रवेश की पूजा भी कराई गई।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जब वह फ्लैट की रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो अविनाश उपाध्याय कथित तौर पर टालमटोल करने लगे। आरोप है कि बाद में जब प्रदीप फ्लैट में रहने पहुंचे तो राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फ्लैट पर अपना अधिकार जताते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया और ताला लगा दिया। प्रदीप का दावा है कि अविनाश उपाध्याय और राम द्विवेदी ने भी राघवेंद्र के दावे की पुष्टि की।
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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का नाम लेकर उन्हें डराया-धमकाया। प्रदीप के अनुसार, उन्होंने मामले की शिकायत 22 जुलाई 2025 को पुलिस आयुक्त से की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। अब 15 अक्टूबर को मामले में संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
वहीं, मामले में राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।


