वाराणसी में HIV संक्रमण के 300 से ज्यादा नए मामले, 18 से 25 साल के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
धर्मनगरी वाराणसी में एचआईवी संक्रमण के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर के बीच जिले में 300 से अधिक नए एचआईवी संक्रमित मरीज सामने आए हैं। वहीं, आसपास के जिलों और बिहार से आने वाले मरीजों के आंकड़ों को मिलाकर यह संख्या 700 के पार बताई जा रही है। इनमें 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं की संख्या अधिक होने की बात सामने आई है।
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असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सिरिंज से संक्रमण का खतरा
जिला अस्पताल की काउंसलर वंदना के अनुसार, पिछले दो से तीन वर्षों में असुरक्षित यौन संबंधों के कारण एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ने की बात सामने आई है। युवाओं के साथ प्रवासी मजदूर भी प्रभावित वर्गों में शामिल हैं। सामाजिक झिझक और संक्रमण को लेकर भेदभाव के डर से कई लोग जांच कराने या अपनी समस्या साझा करने से बचते हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त और दूषित सुई या सिरिंज साझा करने से संक्रमण फैल सकता है। सामान्य संपर्क, हाथ मिलाने या साथ बैठने से एचआईवी नहीं फैलता।
वाराणसी के इन चार क्षेत्रों में अधिक मामले सामने आने का दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मलदहिया, शिवदासपुर, कैंट और सदर बाजार को एचआईवी संक्रमण के अधिक मामले सामने आने वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। हालांकि, इन क्षेत्रों में संक्रमण की दर और कुल मामलों की आधिकारिक पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग के विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता है।
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एचआईवी संबंधी जानकारी के लिए 1097 हेल्पलाइन
एचआईवी और एड्स से जुड़ी जानकारी, परामर्श तथा नजदीकी एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्र का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1097 उपलब्ध है।
काउंसलर वंदना के अनुसार, हेल्पलाइन पर कई लोग असुरक्षित यौन संबंध बनने के बाद संक्रमण के जोखिम और आगे उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जानकारी मांगते हैं। इसके अलावा, एचआईवी संक्रमित लोग भी नजदीकी एआरटी केंद्र की जानकारी लेने के लिए संपर्क करते हैं।
I-SCAN ऐप से जोखिम का आकलन
एचआईवी से बचाव और संक्रमण के संभावित जोखिमों को समझने के लिए आई-स्कैन (I-SCAN) डिजिटल जागरूकता उपकरण का भी उल्लेख किया गया है। यह जोखिम के आकलन और सही जानकारी प्राप्त करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके माध्यम से प्रयोगशाला जांच नहीं की जा सकती।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि संभावित जोखिम के बाद जांच कराने में देरी न करें। हाल में असुरक्षित यौन संपर्क हुआ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें, क्योंकि एचआईवी संक्रमण के जोखिम के बाद कुछ परिस्थितियों में 72 घंटे के भीतर शुरू की जाने वाली पीईपी (पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस) दवा संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है।
समय पर जांच, उचित परामर्श और नियमित उपचार से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकता है। संक्रमण को लेकर झिझकने के बजाय सही जानकारी लेना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।



