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वाराणसी समेत 11 एयरपोर्ट होंगे निजी, 50 साल की लीज पर सौंपने की तैयारी

वाराणसी, अमृतसर और रायपुर समेत देश के 11 हवाई अड्डों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार की योजना के तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) इन हवाई अड्डों को पांच समूहों में बांटकर निजी कंपनियों को 50 साल की लीज पर सौंपेगा। इसके लिए दिसंबर 2026 तक बोली प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक इस प्रक्रिया से जुड़े सौदों को अंतिम रूप देना है।

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इस योजना के तहत पहली बार हवाई अड्डों को अलग-अलग संपत्तियों के बजाय समूहों में शामिल करके निजी कंपनियों के सामने पेश किया जाएगा। सरकार का मानना है कि बड़े हवाई अड्डों के साथ छोटे हवाई अड्डों को जोड़ने से निवेशकों की रुचि बढ़ेगी और छोटे हवाई अड्डों के संचालन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

पांच समूहों में बांटे जाएंगे 11 हवाई अड्डे

प्रस्तावित योजना के तहत हवाई अड्डों को इस प्रकार समूहों में शामिल किया जाएगा।

- वाराणसी समूह: वाराणसी के साथ गया और कुशीनगर हवाई अड्डे।

- अमृतसर समूह: अमृतसर के साथ कांगड़ा हवाई अड्डा।

- भुवनेश्वर समूह: भुवनेश्वर के साथ हुबली हवाई अड्डा।

- रायपुर समूह: रायपुर के साथ औरंगाबाद हवाई अड्डा।

- तिरुचिरापल्ली समूह: तिरुचिरापल्ली के साथ तिरुपति हवाई अड्डा।

इस तरह बड़े हवाई अड्डों के साथ छोटे हवाई अड्डों को जोड़कर निजी कंपनियों के लिए निवेश का एक संयुक्त अवसर तैयार किया जाएगा।


वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए होंगे रोड शो

योजना में अधिक से अधिक निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में रोड शो आयोजित करने की तैयारी कर रही है। मुंबई के अलावा दुबई और सिंगापुर जैसे शहरों में भी निवेशकों के साथ चर्चा किए जाने की योजना है।

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इसका उद्देश्य संभावित बोलीदाताओं को समूह आधारित निजीकरण की प्रक्रिया समझाना, उनकी राय जानना और निवेश को लेकर उनकी आशंकाओं को दूर करना है। अधिकारियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस पहल से बोली प्रक्रिया में अधिक कंपनियों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

अडानी और जीएमआर समेत कई कंपनियों की नजर

इस बोली प्रक्रिया में मौजूदा हवाई अड्डा संचालकों के साथ नए निवेशकों के भी शामिल होने की संभावना है। अडानी समूह और जीएमआर समूह जैसी कंपनियों के अलावा जेएसडब्ल्यू समूह तथा पश्चिम एशिया के कुछ संप्रभु संपत्ति कोष भी संभावित निवेशकों में शामिल बताए जा रहे हैं।


हालांकि, इस मामले में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

निजीकरण के बीच एकाधिकार रोकने की तैयारी

हवाई अड्डों के निजीकरण की इस योजना में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विमानन क्षेत्र में कुछ कंपनियों के बढ़ते दबदबे को रोकना है। फिलहाल अडानी समूह देश का सबसे बड़ा निजी हवाई अड्डा संचालक है, जबकि जीएमआर समूह दिल्ली और हैदराबाद समेत कई प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है।

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ऐसे में सरकार बोली प्रक्रिया के दौरान एक कंपनी या निवेशक समूह को दिए जा सकने वाले हवाई अड्डों की संख्या पर सीमा तय करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों के हाथों में बहुत अधिक हवाई अड्डों का नियंत्रण केंद्रित न हो और प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

वाराणसी के हवाई अड्डे पर क्या होगा असर?

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को गया और कुशीनगर के साथ समूह में शामिल करने की योजना है। यदि प्रस्तावित प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसके संचालन और प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि, यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं, हवाई अड्डे के विकास और शुल्क पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित शर्तों और अंतिम समझौतों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल यह योजना प्रस्तावित निजीकरण प्रक्रिया का हिस्सा है। बोली की शर्तें, कंपनियों का चयन और अंतिम समझौते होने के बाद ही इसके क्रियान्वयन की तस्वीर स्पष्ट होगी।